: Dead
: Heeranagar, Jammu
: 20-01-1923

Father :

Lala Dhojuram

अद��?भ��?त वाग��?मीप��?रगल��?भ तार��?किक तथा शास��?त��?रार��?थ महारथी पं. रामचन��?द��?र देहलवीजी का जन��?म मध��?यप��?रदेश के नीमच नगर में चैत��?र श��?क��?ला सं. 1938 वि. (रामनवमी) (1881) को ह��?आ था। रामनवमी के दिन जन��?म लेने के कारण इनका नाम ‘रामचन��?द��?र’ रक��?खा गया। इनके पिता का नाम म��?न��?शी छोटेलाल तथा माता का नाम श��?रीमती रामदेई था। इनकी प��?रारम��?भिक शिक��?षा नीमच के प��?राथमिक विद��?यालय में ह��?ई। वे बचपन से ही क��?शाग��?र ब��?द��?धि थे। बाद में उन��?होंने डी. ��?. वी. स��?कूल अजमेर से मिडिल की परीक��?षा उत��?तीर��?ण की। मैट��?रिक की परीक��?षा इन��?दौर से ही और प��?रथम श��?रेणी में उत��?तीर��?ण ह��?��?। बस यहीं पर आपकी पढ़ाई का अन��?त हो गया। 18 वर��?ष की आय��? में इनका विवाह श��?रीमती कमला देवी से ह��?आ। अब परिवार के निर��?वाह का दायित��?व भी इन��?हीं पर आ गया।

            जीविका हेत��? पं. रामचन��?द��?र दिल��?ली आये और दिल��?ली के ही होकर रह गये। यहा��? रैली ब��?रदर��?स नामक ��?क अंग��?रेजी फर��?म में 15 र��?. मासिक पर कार��?य करने लगे। क��?छ समय पश��?चात��? इस नौकरी को छोड़ कर अपने श��?वस��?र की द��?कान पर स��?वर��?णकारी का काम करने लगे। इस कार��?य में उन��?हें सफलता और लोकप��?रियता प��?राप��?त ह��?ई। जब ये 36वर��?ष के ही थेइनकी पत��?नी का निधन हो गया किन��?त��? अनेक प��?रस��?ताव आने पर भी आपने प��?नर��?विवाह नहीं किया। इन��?हीं दिनों पं. रामचन��?द��?र देहलवी अपना पर��?याप��?त समय धार��?मिक ग��?रन��?थों के अध��?ययन में लगाते थे।

            उन दिनों दिल��?ली के चांदनी चैक स��?थित फव��?वारे पर सप��?ताह में दो दिन म��?सलमान मौलवी तथा ईसाई पादरी सार��?वजनिक रूप से धर��?म प��?रचार करते थे। पं. रामचन��?द��?र इनके व��?याख��?यानों को स��?नते और परमतावलम��?बियों द��?वारा हिन��?दू धर��?म पर किये जाने वाले आक��?षेपों को स��?न कर उन��?हें बड़ी ग��?लानि होती। वे मन में सोचने लगे कि यदि इन मिथ��?या बातों का वे दो टूक उत��?तर देने की क��?षमता अपने में प��?राप��?त नहीं करते तो उनके धार��?मिक ग��?रन��?थों के स��?वाध��?याय का लाभ ही क��?या हैअन��?ततः उन��?होंने पादरियों और मौलवियों के प��?रचार का म��?काबिला करने का निश��?चय किया। उन��?होंने उसी स��?थान पर नियमित रूप से व��?याख��?यान देना आरम��?भ कर दिया। अब पादरियों और मौलवियों को मजलिस उखड़ने लगी और लोग देहलवीजी का व��?याख��?यान स��?नने के लिये बड़ी संख��?या में ��?कत��?र होने लगे। जब श��?रोताओं की भीड़ के कारण चांदनी-चैक के यातायात में श��?री बाधा पड़ने लगी तो प��?लिस ने इनके व��?याख��?यानों के लिये गांधी-ग��?राउण��?ड का स��?थान नियत कर दिया।1910 से 1924 तक देहलवीजी बिना किसी व��?यवधान के वहां अपने व��?याख��?यानों का क��?रम चलाते रहे। इसी बीच उनके प��?त��?र व पत��?नी का भी निधन हो गयाकिन��?त��? उनके व��?याख��?यान क��?रम में कोई बाधा नहीं आई।

            अब वे ��?क अपंग हाफिजजी को अपना ग��?र��? बना कर उनसे विधिवत��? क��?रान का अध��?ययन करने लगे। तत��?पश��?चात��? उन��?होंने मौलवियों और पादरियों से शास��?त��?रार��?थ करने आरंभ कियेजिनमें उन��?हें सदा ही विजयश��?री मिलीं। देहलवीजी द��?वारा किये गये शास��?त��?रार��?थों के संस��?मरण बह��?त अधिक हैं और वे रोचक तथा शिक��?षाप��?रद भी हैं। वैदिक-धर��?म के उत��?कृष��?ट प��?रवक��?ता के रूप में उनकी ख��?याति सर��?वत��?र फैल गई। वे समस��?त भारत की आर��?यसमाजों द��?वारा व��?याख��?यानों के लिये आमंत��?रित किये जाते। हैदराबाद दक��?षिण में तो उनके व��?याख��?यानों ने अपूर��?व जागृति तथा हलचल पैदा कर दी। निजाम के शासन ने अनके व��?याख��?यानों पर प��?रतिबंध तो लगाया हीउन��?हें अपने राज��?य से निष��?कासित भी किया। फरवरी 1968 को दिल��?ली में देहलवीजी का निधन ह��?आ।

            ले. का.-दो सनातन सत��?ता��?ंसत��?यार��?थप��?रकाश के चत��?र��?दश सम��?ल��?लास में उद��?धृतं र��?क��?आन की आयातों का देवनागरी में उल��?था और अन��?वाद (1945), ईश��?वर सिद��?धिईश��?वरोपासनाधर��?म और अधर��?मईश��?वर में अविश��?वास क��?योंविद��?यार��?थी और सदाचारईश��?वर पूजा का वैदिक स��?वरूपइंजील के परस��?पर विरोधी वचनपौराणिकों से शास��?त��?रार��?थ का विषय निश��?चित करते समय ध��?यान में रखने योग��?य बातेंर��?क��?आन में अन��?य मतावलम��?बियों के लिये क��?छ अति कठोरउत��?तेजक वाक��?यों का संग��?रह (1944) आर��?यसमाज की मान��?यता��?ंआर��?यसमाज के मन��?तव��?य,क��?रान का अन��?वाद (सूर ��? बकर और सूर के फातिहा)रामचन��?द��?र देहलवी लेखावली (1938).  1. ईश��?वर ने द��?निया क��?यों बनाई? 2. पूजा क��?याक��?यों और कैसे ?  3. वेद का इस��?लाम पर प��?रभाव।

          

 


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