: Dr. Satya Prakash
: Vanprasth
: Married
: Dead
: 24-08-1905
: Arya Samaj Mandir, Bijnor
: 18-01-1995
: Korba, Amety Sultan Pur
: Sahej Om Uccharan Ke Sath

Father :

Shri Ganga Prasad Upadhyay

Spouse :

Dr ratnakumaari

सवामी सतयपरकाश सरसवती का वयकतितव अनेक अदभत विशिषटताओं से संपनन था । उनहें ‘विजञान, धरम और साहितय की तरिवेणी ” ठीक ही कहा गया है सभी विशेषतां क साथ क ही वयकति में बहत कम देखने में आती हैं । सवामी जी विविध विषयों पर परभावी ढंग से सारगरभित वयाखयान देने में अपने समय में अदभत थे ।

विशवविदयालयों में विजञान की शिकषा हेत ऊचे सतर के गरनथ अंगरेजी में अधिकतर बरितिश विजञान विशारदो दवारा लिखित ही उपलबध होते थे । डॉ. सतयपरकाश, इलाहाबाद विशवविदयालय के विजञान संकाय में अधयापक होने के कारण भारतीय विदयारथियों की आवशयकताओं को भली-भाति अनभव करते थे ।

अतः उनहोंने इसे दृषटि में रखते ह अंगरेजी में विजञान से संबदध कई उपयोगी गरनथ लिखे जो इस दिशा में उतकृषट उदाहरण उपसथित करते हैं ।भारत ने पराचीन काल में विजञान की विविध विधाओं में अनवेषण कर विसमयकारी परगति परापत की थी । डॉ. सतयपरकाश ने समरपित भाव से अथक परिशरम कर ततकालीन साहितय को नवजीवन दे पूरणरूपेण परमाणित कर दिया कि यह देश विजञान के कषेतर में अनय देशों की अपेकषा सरवाधिक अगरणी वं सरवोपरि है ।

वेदपरायण सवामी सतयपरकाश सरसवती उचचकोटि के विदवान वं महान चिनतक थे तथा वह असीमित रचनातमक ऊरजा के धनी थे । वेदों की जञान गरिमा को विदेशी भी सम लें अत व अंगरेजी में विशदरूप से २६ खणडों में चारों वेदों का अथक परिशरम से यथातथय परसतत किया गया अनवाद सामी जी का क सथायी संपतति की भाति सरवोपरि अनदान है । वैदिक वाङमय संबनधी अनेक साहितयों का सृजन भी किया जिनमें शतपथ बराहमण की भूमिका, उपनिषदों की वयाखया योगभाषय  आदि विशेष पठनीय हैं ।  विजञान संबनधी अनेक पसतकें सवामी जी ने लिखी हैं जो विशव विदयालय के पाठयकरमों में तथा शोधारथिओं के पाथेय बने ह हैं ॥


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