: Acharya dev Sharma
: Vanprasth
: Single
: Dead
: 02-07-1896
: Hardoi(Charthaval)
: 09-06-1970
: Charthaval
: Simpal Way

Father :

Pandit Ram Prasad

 गरकल कांगड़ी के ऋषिकोटि के आचारय अभय अपने सादे रहन-सहन, अपरिगरह त‍याग, तप, आध‍यात‍मिक जीवन और गम‍भीर जञान से पराचीन काल के ऋषि परतीत होते थे। वे अनेक रूपों में हमारे सामने आते हैं। कभी हम उन‍हें छोटी आय में ही योग के लिये कानतवास करते देखते हैं, कभी साबरमती आरम के साधक और गांधी जी के विश‍वस‍त परामरशदाता के रूप में पाते है, कभी सत‍यागरह आन‍दोलन में सकरिय भाग लेते और जल जाते देखते हैं, कभी गरकल के आचारय के रूप में विशाल जन समूह के समकष नव-स‍नातकों को दीकषान‍त का मारमिक उपदेश करते पाते हैं, कभी आरयसमाज की वेदी से आरयजनता के सम‍मख वैदिक-साहित‍य के मरमजञ लेखक के रूप में हमारे सामने आते है, कभी शरी अरविन‍द के योगमारग के पथिक के रूप में अनेक दरशन होते है।

      वे छातरों के विकास में रचि रखते थे परभावशाली भाषण देते थे। वरताभ‍यास करते थे। गरन‍थ लेखन वं संपादन करते थे। स‍नातकों के हित चिंतक थे। अपने कारय स‍वयं करते वं करने की सीख देते थे। स‍वदेशी विचारक थे।   

      आपके दवारा लिखी पस‍तक वैदिक-विनय भक‍ति की निररिणी बहा देती है। इस पस‍तक ने करोड़ों लोगों के हृदय को आस‍तिकता के महासागर में अवगाहन कराया है। बरहमचरयसूक‍त की व‍याख‍या भी आपने लिखी है।  


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